गर्मी से देश में कोरोनावायरस के संक्रमण दर में कमी की संभावना

गर्मी से देश में कोरोनावायरस के संक्रमण दर में कमी की संभावना


भारतीय सूक्ष्मजीव वैज्ञानिकों ने कहा है कि देश में तेज गर्मी पड़ने के दौरान कोरोनावायरस के संक्रमण की दर में कमी आ सकती है । एनआईएच और प्रोजेक्ट एंथ्रेक्स पर अमेरिकी सेना के लैब के साथ काम कर चुके भारतीय माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रोफेसर वाई सिंह ने बताया कि अप्रैल के अंत तक 40 डिग्री से अधिक का तापमान कोरोनावायरस के असर को कम कर सकता है । प्रोफेसर सिंह ने कहा तापमान अधिक होने पर किसी भी सतह पर वायरस के जीवित रहने की अवधि कम होगी । अमेरिका के प्रसिद्ध संक्रामक रोग विशेषज्ञ एंथोनी फौसी के साथ काम कर चुके वायरोलॉजिस्ट डॉ अखिल सी. बनर्जी ने कहा कि तापमान 40 डिग्री के आसपास है, तो यह वायरस को निष्क्रिय करने में मदद करता है ।

गर्मी से देश में कोरोनावायरस के संक्रमण दर में कमी की संभावना
Coronavirus

लॉकडाउन बढ़ेगा


15 उद्योग खुलेंगे,ग्रीन जोन में बाजार भी

कोरोना से जंग के लिए 14 अप्रैल के बाद 2 सप्ताह तक लॉक डाउन जारी रहना तय है । लेकिन उद्योग मंत्रालय ने टेक्सटाइल निर्माण जेम्स एंड ज्वैलरी जैसे 15 बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में काम शुरू करने की सिफारिश की है । साथ ही स्ट्रीट वेंडर्स को काम करने की मंजूरी देने की भी बात कही गई है । हालांकि इस बारे में आखिरी फैसला प्रधानमंत्री के स्तर पर होना है। लॉक डाउन में छूट कोरोना संक्रमण के फैलाव ,भविष्य की आशंका और एक्टिव मामलों के आधार पर मिलेगी । सरकार देश के इलाकों को राज्यों के बजाय कोरोना के संक्रमण के स्तर के हिसाब से रेड ,ऑरेंज और ग्रीन जोन में बांटकर ढील संबंधी नियम तय करेगी । अभी हॉटस्पॉट वाले जिले रेड जोन में रहेंगे वहां पहले की तरह सब कुछ बंद रहेगा । ऑरेंज और ग्रीन जोन में बाजार खोले जा सकते हैं । लेकिन इसके लिए समय सीमित किया जा सकता है । लेकिन एक बात स्पष्ट है कि सभी प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और खेल संबंधी आयोजन पर पाबंदी बनी रहेगी । सिनेमा हॉल ,मॉल पार्क, समुद्र तट ,पर्यटन स्थल, धर्मस्थल और शिक्षण संस्थान भी नहीं खुलेंगे ।

गर्मी से देश में कोरोनावायरस के संक्रमण दर में कमी की संभावना
COVID-19

लॉकडाउन में कलर कोडिंग के हिसाब से होगा काम


हॉस्पिटैलिटी: सिर्फ ग्रीन जोन में शुरू

रेड और ऑरेंज जोन में सभी होटल,रेस्त्रां,लॉज और गेस्ट हाउस बंद रहेंगे । ग्रीन जोन में खुल सकते हैं ।

परिवहन:रेड और ऑरेंज जोन में नहीं

सिर्फ ग्रीन जोन में लोकल परिवहन खोलने की छूट दी जाएगी । लेकिन रेड और ऑरेंज जोन में परिवहन नहीं चलेगा ।

उड़ान सेवा: सिर्फ चुनिंदा देशों के लिए

भारत से बाहर जाने के लिए विशेष और कमर्शियल उड़ाने की छूट मिलेगी । चुनिंदा देशों के लिए उड़ान की सीमित छूट रहेगी ।

आबकारी मामले: राज्य नियम बनाएंगे

शराब की दुकानें खोलने की मंजूरी होगी। इनमें कलर कोडिंग का स्तर राज्य सरकार खुद तय करेंगे ।


देश के भंडारों में 9 महीने के लिए अनाज मौजूद: पासवान


केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि पीडीएस के तहत 81 करोड़ लाभार्थियों को बांटने के लिए केंद्र सरकार के पास 9 महीने तक का राशन गोदामों में मौजूद है । इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है । अभी देश भर के गोदामों में 534.78 लाख मैट्रिक टन चावल और गेहूं है । जबकि मासिक जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत आपूर्ति 60 लाख मीट्रिक टन है । आने वाली रबी की फसल की बंपर उपज से और मजबूती मिलने वाली है इसलिए सरकार का अनुमान है कि 2 साल तक के लिए पर्याप्त स्टॉक होगा ।

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Corona


कोरोना को लेकर विशेषज्ञों ने किया दावा


देश के 80% लोग संक्रमित हुए तो बाकी में हार्ड इम्यूनिटी पैदा होगी, पर हालात नहीं संभलेंगे


यह वायरस बहुत लंबे समय तक साथ रहेगा यह यूं कहें कि अब यह हमारे साथ ही रहेगा । यह कितना खतरनाक होगा अभी तक के अनुभव से अंदाजा लग गया है । सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया तो इसके संक्रमण से हम लंबे समय तक बच सकते हैं । ऐसा ना किया तो भविष्य में देश की 70 से 80% आबादी इस वायरस की चपेट में आ सकती है ।

70 से 80% आबादी वायरस से प्रभावित होने के कारण बाकी 20% लोगों में कोरोना से लड़ने की क्षमता यानी हार्ड इम्यूनिटी पैदा हो जाएगी । लेकिन बड़ी आबादी एक साथ संक्रमित होगी तो हम उन्हें नहीं संभाल पाएंगे । हम इतनी बड़ी आबादी के साथ संक्रमित होने की सोच भी नहीं सकते । इसलिए सरकार बचाव और रोकथाम के उपाय कर रही है इसी से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या कम की जा सकती है ।

सोशल डिस्टेंसिंग से अच्छा विकल्प फिलहाल नहीं है । कोरोना वायरस से बने हालात एक से डेढ़ साल रह सकते हैं । दुनिया भर में वैज्ञानिक कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन और दवा पर काम कर रहे हैं । हालांकि जान बचाने के लिए लोगों को बुनियादी चीजें भी उपलब्ध कराना होगा । इसके लिए देश को इमरजेंसी कॉरिडोर बनाना चाहिए ।

गर्मी से देश में कोरोनावायरस के संक्रमण दर में कमी की संभावना
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जब तक कोई दवा या वैक्सीन नहीं आती है तब तक इस वायरस से बचने की दवा और वैक्सीन एक दूसरे से दूरी खांसते और छींकते समय नाक,मुंह पर रुमाल या टिश्यू पेपर रखना,साफ-सफाई सबसे अच्छी दवा और वैक्सीन होगी ।

शुरुआती दौर से ही ज्यादा जांच होनी चाहिए थी । जांच का दायरा अब और बढ़ाना चाहिए क्योंकि अब तो ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखे थे । अलग-अलग राज्यों के जिलों में रेंडम सेंपलिंग करके जांच होनी चाहिए । इससे निष्कर्ष निकलेगा कि वायरस कहां और किस रूप में फैला हुआ है । इसके बाद इस संकट से निपटने में नीति बनाने में आसानी होगी । राजस्थान के भीलवाड़ा और केरल का मॉडल इसके उदाहरण है । जिस इलाके में संक्रमित लोग मिले उससे पूरी तरह से लॉक डाउन ही करना होगा ।

कोरोना टेस्ट :38 देशों के 500 वैज्ञानिकों ने बनाई प्रश्नावली, आरोग्य एप से भी जुड़ेगी


किचन के मसाले चखे, पता चल जाएगा कोरोना है या फ्लू

जल्दी घर बैठे ही व्यक्ति कोरोना संक्रमण के लक्षणों की सही पड़ताल कर सकेगा । भारत समेत करीब 38 देशों के 500 वैज्ञानिकों ने एक प्रश्नावली तैयार की है । इससे आसानी से पता चल जाएगा कि किसी व्यक्ति को कोविड-19 बीमारी है या आम फ्लू ।

दरअसल, दोनों बीमारियों के लक्षण कई मामलों में एक से हैं । इसलिए यह भांप पाना मुश्किल होता है कि कोविड-19 का टेस्ट कराने की जरूरत है या नहीं । वैज्ञानिकों ने जिस प्रश्नावली को तैयार किया है वह एक तरह का सर्वे है इसमें आपके किचन में उपलब्ध मसालों और बूटियों को चखकर आपको जवाब देना होगा । इसी के आधार पर परिणाम पता चलेगा ।

गर्मी से देश में कोरोनावायरस के संक्रमण दर में कमी की संभावना
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भारत से सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट ऑर्गेनाइजेशन के डॉक्टर रितेश कुमार, डॉक्टर अमोल पी. भोंडेकर और डॉक्टर रिशमजीत सिंह भी इस समूह में काम कर रहे हैं । टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज और आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक भी इसका हिस्सा है। समूह सांस की बीमारी होने पर सुंघने और स्वाद आने की शक्ति कम होने की थ्योरी पर काम कर रहा है । इन दिनों रॉयल सोसाइटी की फैलोशिप पर यूके में मौजूद डॉक्टर रितेश ने बताया कि सार्स के बाद दक्षिण कोरिया ने सबसे पहले इस पर स्टडी की थी । उसमें पता चला था कि ऐसे संक्रमण में 30% मामलों में स्वाद और गंध लेने की क्षमता पर असर पड़ता है । जिन देशों में एथिकल क्लीयरेंस मिल चुकी है वहां अस्पतालों में भी इसे लागू किया जा चुका है । भारतीय वैज्ञानिकों ने भी सूंघने की क्षमता को चेक करने के लिए प्रश्नावली व एप तैयार किया है ।