Corona Virus । क्वारेंटाइन - आइसोलेशन क्या है ?

Corona Virus । क्वारेंटाइन - आइसोलेशन क्या है ?



क्वारेंटाइन क्या है ?



  • यह स्वास्थ व्यक्ति को अलग रखने के लिए है, जिसके संक्रमित होने की आशंका है ।
  •  क्वारेंटाइन में उसे रखते हैं ,जो हाल ही में प्रभावित देश से लौटा है ,या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो ।
  • यह कम से कम 14 दिन के लिए होता है, क्योंकि 14 दिन में स्पष्ट हो जाता है कि व्यक्ति बीमार है या नहीं ।
  • इसमें व्यक्ति परिवार के साथ घर में अलग कमरे में सावधानी बरतते हुए रह सकता है ।


आइसोलेशन क्या है ?


  • उन लोगों के लिए है जिनमें लक्षण दिख रहे हैं या जिनका टेस्ट पॉजिटिव आया है ।
  • आइसोलेशन में उस व्यक्ति को अलग रखा जाता है जिसके लक्षण स्पष्ट होते हैं ,और तय हो जाता है कि वह बीमार है ।
  • यह तब तक चलता है जब तक व्यक्ति पूरी तरह ठीक ना हो जाए और कोई लक्षण नजर ना आए ।
  • इसमें बीमार व्यक्ति को अकेले रहना होता है ,डॉक्टर की निगरानी भी जरूरी है ।
Corona Virus | Covid-19
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कोरोनावायरस से बचने के उपाय 


कोरोनावायरस के खिलाफ देश में  चल रहे 21 दिन के महायुद्ध में हमारे हथियार कोई दवाई या भारी भरकम तकनीक नहीं है ।यह बहुत साधारण चीजें हैं जो इन दिनों हमारे जीवन में किसी हीरो का दर्जा रखती है ,और हर जगह नजर आ रही है यह है साबुन ,हैंड सैनिटाइजर और काफी हद तक मास्क ।

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साबुन : साबुन में 50 नैनोमीटर तक छोटे वायरस मारने की क्षमता


कोरोनावायरस से बचाव में जिस उपाय का सबसे ज्यादा जिक्र हो रहा है वह साबुन से बार-बार हाथ धोना। डब्ल्यूएचओ से लेकर डॉक्टर और स्वास्थ्य मंत्रालय तक सभी यही सलाह है कि साबुन से दिन में छह से आठ बार तक हाथ धोए। जो वायरस एल्कोहल और क्लोरीन छीड़कने से भी नहीं मरते , वह साबुन से खत्म हो जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक साबुन 50 से 200 नैनोमीटर तक छोटे आकार के वायरस मार सकता है। ज्यादातर लोग दिन में दो से 5 मिनट तक अपने चेहरे को हाथ लगाते हैं अगर वायरस हाथ पर रहा जाता है और आप चेहरे पर हाथ लगाते हैं तो कोरोनावायरस के आपके स्वशन तंत्र में जाने की आशंका रहती है ।

हैंड सैनिटाइजर : सैनिटाइजर में कम से कम 60 फ़ीसदी एल्काहोल होना जरूरी


एक अध्ययन के मुताबिक हैंड सैनिटाइजर बीमारियों को 26% तक कम कर सकता है । यह सभी तरह के कीटाणु नहीं मार सकता ,लेकिन कोरोनावायरस में कारगर है । सीडीसी के मुताबिक यह तभी प्रभावी है जब इसमें कम से कम 60% एल्काहोल हो । डब्ल्यूएचओ ने भी एल्काहॉल बेस्ड हैंड सेनीटाइजर की सलाह दी है।  हालांकि सीडीसी सैनिटाइजर की तुलना में साबुन को ज्यादा कारगर बनता है ।

कैसे काम करता है : साबुन की ही तरह सैनिटाइजर कोरोना वायरस की अंदरूनी सतह पर असर करते हैं ,लेकिन अगर हाथ गंदे हो ,उनमें पहले ही चिकनाई या कोई अन्य गंदगी चिपकी हो तो पहले पानी से ही हाथ धोए ।

घर में नहीं बनता सैनिटाइजर : कई लोग घर में ही हैंड सैनिटाइजर बनाने के तरीके बता रहे हैं। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन की प्रोफेसर सैली ब्लूमफील्ड कहती है कि घर पर सैनिटाइजर बना ही नहीं सकते । इसमें अन्य केमिकल्स के साथ 60-70% एल्काहॉल की जरूरत होती है जो घर पर नहीं हो सकती ।

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मास्क : डब्ल्यूएचओ ने बताया है ,कब पहने कैसे पहने ?


मास्क बीमार व्यक्ति से बाकी लोगों में संक्रमण फैलने से रोकने में मदद कर रहे हैं । डब्ल्यूएचओ के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति खांसी या छींक से पीड़ित या संक्रमण की आशंका वाले व्यक्ति और कोरोनावायरस का इलाज कर रहे या साथ रह रहे व्यक्ति मास्क जरूर पहने साथ ही स्वस्थ व्यक्ति को मास्क की जरूरत नहीं है। केवल मास्क पहनने से बचाव नहीं होगा ।बार-बार हाथ धोना या सैनिटाइजर इस्तेमाल करना भी जरूरी है ।

मास्क कैसे पहने और उतारे : मास्क पहनने से पहले साबुन या सैनिटाइजर से हाथ साफ करें । मास्क से मुंह और नाक को अच्छे से ढके कहीं कोई गैप ना रहे। जब मास्क पहने हो तो इसे छूने से बचे। सिंगल यूज मास्क को दोबारा इस्तेमाल ना करें ।मास्क हटाने के लिए इसे पीछे से खोलें कभी भी आगे का हिस्सा ना छुएं ।