देश में 2 सप्ताह तक बढ़ सकता है लॉकडाउन

देश में 2 सप्ताह तक बढ़ सकता है लॉकडाउन



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बात की


कोरोना से निपटने के लिए देशभर में लॉकडाउन को 30 अप्रैल तक बढ़ाया जा सकता है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद के दौरान अधिकांश ने इसकी मांग की और प्रधानमंत्री ने सहमति जताई । इस पर दिशा-निर्देश जल्द जारी होंगे। प्रधानमंत्री ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए सभी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की ज्यादातर राज्यों ने लॉक डाउन बढ़ाने पर सहमति दी । इसके बाद प्रधानमंत्री ने लॉक डाउन 2 हफ्ते बढ़ाने के संकेत दिए हैं ।

किसानों को राहत संभव:माना जा रहा है कि लॉक डाउन बढ़ाने पर किसानों और आवास सुविधा वाली औद्योगिक इकाइयों को भी छूट मिल सकती है । बैठक में मोदी ने आरोग्य सेतु एप पर जोर देते हुए कहा इसका उपयोग भविष्य में ई-पास के रूप में हो सकता है ।

मोदी बोले, मैं हमेशा उपलब्ध: मोदी ने मौजूदा हालात को लेकर चर्चा की साथ ही कोरोना से निपटने के लिए राज्यों से सुझाव भी मांगे । मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि आप सभी के लिए हर वक्त उपलब्ध हूं ।

तीन राज्यों ने लॉकडाउन बढ़ाया: देर शाम महाराष्ट्र,पश्चिम बंगाल और तेलंगाना ने लॉक डाउन  30 अप्रैल तक बढ़ाने का फैसला लिया । इससे पहले ओडिशा और पंजाब भी लॉक डाउन बढ़ा चुके हैं ।

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Coronavirus

चौबीस घंटे में कोरोना से 36 मारे, 768 नए संक्रमित


पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमित 36 लोगों ने दम तोड़ दिया ।इसके साथ ही देश में शनिवार को इस महामारी से मरने वालों की संख्या 242 तक पहुंच गई । केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि शुक्रवार शाम से अब तक 36 लोगों की मौत हुई है । इसके साथ ही 7,529 लोग वायरस से अब तक संक्रमित हो चुके हैं ।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले 24 घंटे में 768 नए रोगियों की पुष्टि हुई है ,वहीं अब तक 652 संक्रमित ठीक हो कर घर जा चुके हैं ।


महाराष्ट्र,तमिलनाडु और दिल्ली में सबसे ज्यादा केस


महाराष्ट्र,दिल्ली और तमिलनाडु सर्वाधिक संक्रमित मामलों वाले राज्य हैं । महाराष्ट्र में 92 नए मामले सामने आए हैं, जम्मू कश्मीर में 17 नए मामले शनिवार को सामने आए राज्य में संक्रमित लोगों की संख्या 224 हो गई है । राजस्थान में कोरोनावायरस संक्रमण के 18 नए मामले सामने आए हैं ।

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COVID-19



अगर लॉक डाउन नहीं होता तो 15 अप्रैल तक 1.2 लाख हो जाती संक्रमितों की संख्या


लॉक डाउन की अवधि 2 हफ्ते बढ़ाए जाने की संभावनाओं के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को दावा किया कि अगर मौजूदा बंदी नहीं लागू की गई होती तो 15 अप्रैल तक देश में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या 1.2 लाख तक पहुंच जाती । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने नियमित प्रेस वार्ता में बताया कि लॉक डाउन से पूर्व अधिकतम संक्रमण वृद्धि दर को आधार मानकर संख्या का आकलन किया है । हालांकि यह आईसीएमआर का अध्ययन नहीं है जैसा की अटकलें लगाई जा रही थी । उन्होंने तीन तरह के आकलन के आंकड़े पेश किए हैं । अग्रवाल ने कहा कि यदि कोरोना संक्रमण को रोकने के कोई प्रयास नहीं किए जाते और लॉक डाउन नहीं होता तो देश में 4 अप्रैल तक 2.08 लाख तथा, 15 अप्रैल तक 8.2 लाख रोगी सामने आ सकते थे । इसी तरह यदि रोकथाम के उपाय किए जाते और लॉक डाउन नहीं होता तो रोगियों की संख्या 9 अप्रैल तक 45,370, 15 अप्रैल तक 1.2 लाख पर पहुंच सकती थी । अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने दोनों कदम उठाए हैं । लॉक डाउन और चिकित्सा उपाय भी किए हैं ।

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Corona

1 लाख बेड का इंतजाम:अग्रवाल ने बताया कि राज्यों में अब तक 586 कोविड अस्पताल तैयार किए जा चुके हैं । अस्पतालों में एक लाख से अधिक आइसोलेशन बेड उपलब्ध हैं ।

वृद्धि दर पर आधारित विश्लेषण


स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि लॉक डाउन से पूर्व कोरोना संक्रमण की अधिकतम वृद्धि दर 41 फ़ीसदी रही थी । इसी के आधार पर 8.2 लाख मामलों का आकलन किया गया वहीं रोकथाम के उपाय शुरू करने के बाद संक्रमण अधिकतम 28.9 फ़ीसदी की दर से बढ़ा । जिसके आधार पर बिना लॉक डाउन के 1.2 लाख संक्रमित होने का अनुमान लगाया गया है ।


टीका बनाने में सौ से ज्यादा संस्थान जुटे


कोरोना के खात्मे का टीका तैयार करने में दुनिया के सबसे ज्यादा कंपनियां, यूनिवर्सिटी और शोध संस्थान जुट गए हैं । टीका तैयार करने में एक से डेढ़ साल तक का समय लग सकता है ।ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने सितंबर तक पहली वैक्सीन बाजार में लाने का दावा किया है ।

मशहूर अमेरिकी विषाणु विज्ञानी जॉन कोहेन ने एक इंटरव्यू में कहा है कि यह पहली बार है कि किसी वायरस का टीका तैयार करने की इतनी जल्दी शुरुआत हुई हो  । चीन ने 1 जनवरी को अधिकृत तौर पर कोविड-19 का खुलासा किया था और 10 जनवरी को ही इसके जिनोम की संरचना  को वैज्ञानिकों ने डिकोड कर लिया। इससे टीका तैयार करने का पहला चरण कहा जाता है । डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन समेत दिग्गज देशों के संस्थानों ने इसके लिए अपनी ताकत झोंक दी है । भारत में 20 उच्च शिक्षा संस्थान वैक्सीन विकसित करने में लगे हैं।

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वैक्सीन विकास के तीन अहम चरण


किसी वैक्सीन के विकास में तीन अहम चरण होते हैं इन्हें शोधात्मक, प्रीक्लिनिकल और क्लीनिकल नाम दिया गया है । तीन प्रयोगशाला के स्तर पर तीन तरह की टेस्टिंग होती है उसके बाद तीन चरणों में मानव पर परीक्षण होता है ।

शोधात्मक

जीनोड डिकोड के बाद वायरस के कमजोर कड़ी की पहचान ।

प्रीक्लिनिकल

जानवरों में वायरस के नमूने डाल देखा जाता है कि उनके शरीर पर एंटीबॉडी उत्पन्न होते हैं या नहीं ।

क्लीनिकल डेवलपमेंट

वैक्सीन का शीर्ष संस्थाएं परीक्षण करती है और दुष्प्रभावों का अध्ययन होता है ।

इंसानों पर भी तीन चरणों में परीक्षण होगा

इसके बाद तीन व्यापक स्तर पर इसका इंसानों पर परीक्षण शुरू होता है । उस देश की और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की निगरानी में हर चरण के नतीजे के मुताबिक गुणवत्ता में सुधार किया जाता है ।


वायरस के ज्यादा घातक रूप ने अमेरिका-यूरोप में तबाही मचाई


कोरोना ने चीन के मुकाबले अमेरिका यूरोपीय देश इटली, फ्रांस और स्पेन में ज्यादा तबाही क्यों बचाए ? इसकी गुत्थी सुलझी नजर आ रही है । कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोध से खुलासा हुआ है कि चीन से निकले वायरस ने तीन रूप बदले । यूरोप और अमेरिका में इसने ज्यादा जानलेवा रूप धारण कर 1 लाख लोगों की जान ले ली ।

कैंब्रिज के अनुवांशिक वैज्ञानिकों ने पूरी दुनिया में वायरस के अलग-अलग 160 नमूनों के जीनोम का रिकॉर्ड खंगाला । इससे इसकी तीन अलग-अलग वंशावली सामने आई जिससे ए,बी और सी नाम दिया गया है । वायरस चीन से बाहर रूप बदलकर घातक हो गया।  इटली,स्पेन के नागरिकों में ऐसे संक्रमण झेलने की उतनी प्रतिरोधी क्षमता नहीं थी जितनी चीन के लोगों में थी । चीन में सार्स, मर्स जैसे वायरस ने हमला किया है लिहाजा वहां कम कहर बरसा ।


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Lockdown

चीन से अलग:शोधकर्ताओं ने कहा कोरोना के जिस रूप ने ब्रिटेन को निशाना बनाया, वह चीन में वायरस के नमूने से अलग था । ब्रिटेन में यह सिंगापुर, दक्षिण कोरिया या हांगकांग से आया । कोरोना सिंगापुर और जर्मनी से इटली पहुंचा पर बदले रूप में उसने इटली में ज्यादा विनाश लीला दिखाई  । वहीं अमेरिका में वायरस का शुरुआती संक्रमण ए टाइप का था जो चीन से आया था । पर बाद में यूरोप से इसका घातक नमूना वहां पहुंचा,जिससे वहां भी रिकॉर्ड मौतें हो रही है । 24 दिसंबर 2019 से 4 मार्च 2020 तक कई देशों से 160 वायरस जीनोम के नमूनों का यह अध्ययन जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ ।